उत्तर प्रदेश SIR: काट दिए गए 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम

विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची की “शुद्धता” और “विश्वसनीयता” के नाम पर लागू किया जा रहा है, लेकिन इसका विस्तार और समय-चयन इसे एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया से कहीं अधिक राजनीतिक रूप से संवेदनशील हस्तक्षेप बना देता है। उत्तर प्रदेश के अलावा पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, गोवा, पुडुचेरी, अंडमान-निकोबार द्वीपसमूह और लक्षद्वीप सहित कुल 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया चल रही है।

Up sir ps pac analysis
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SIR की प्रासंगिकता पर सवाल क्यों ?

बिहार विधानसभा चुनाव के परिणाम कहीं न कहीं वहां लागू SIR की प्रक्रिया को सवालों के घेरे में खड़ा करते हैं। जिस राज्य में बड़े पैमाने पर पलायन, अस्थायी निवास और गरीबी एक सामाजिक यथार्थ है, वहाँ घर-घर सत्यापन के आधार पर मतदाताओं को “अनुपस्थित” या “ट्रेस न होने योग्य” बताकर सूची से बाहर करना, आयोग की प्रक्रिया-आधारित निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। कई निर्वाचन क्षेत्रों में SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं की संख्या पिछली चुनावी जीत-हार के अंतर से भी अधिक रही, जिससे यह संदेह और गहराता है कि SIR कहीं केवल मतदाता सूची की सफ़ाई नहीं, बल्कि चुनावी गणित को पुनर्संतुलित करने का एक मौन औज़ार तो नहीं बनता जा रहा। इसी पृष्ठभूमि में उत्तर प्रदेश में लागू SIR और उसके तहत सामने आए करोड़ों नामों की कटौती को केवल एक “प्रशासनिक औपचारिकता” बताकर टालना लोकतांत्रिक व्यवस्था का अपमान होगा। इस पर देश के सभी विपक्षी दलों को गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है ।

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उत्तर प्रदेश SIR: हर पाँच में से एक मतदाता बाहर

उत्तर प्रदेश के राज्य मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने 6 जनवरी 2026 को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में Special Intensive Revision (SIR) की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी करते हुए ऐसे आंकड़े प्रस्तुत किए, जिन्होंने राज्य की मतदाता संरचना पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। वर्ष 2025 में जहाँ उत्तर प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या 15 करोड़ 44 लाख 30 हजार 92 थी, वहीं SIR के बाद जारी ड्राफ्ट सूची में यह संख्या घटकर 12 करोड़ 55 लाख 56 हजार 25 रह गई है। यानी लगभग हर पाँच में से एक मतदाता (18.70 प्रतिशत) ड्राफ्ट सूची से बाहर हो गया है और इस तरह उत्तर प्रदेश SIR के दौरान 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम काट दिए गए। इस पूरी प्रक्रिया में मात्र 15 लाख 78 हजार 483 नए मतदाताओं को जोड़ा जाना इस कटौती के अनुपात को और अधिक असंतुलित बनाता है।
PS-PAC | UP SIR – Draft Electoral Roll Analysis
PS-PAC | UP SIR – Draft Electoral Roll Analysis
निर्वाचन आयोग के अनुसार, SIR की ड्राफ्ट सूची 6 जनवरी 2026 को प्रकाशित की गई है, जिस पर दावा और आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि 6 फरवरी 2026 निर्धारित की गई है। प्राप्त दावों और आपत्तियों का निस्तारण 27 फरवरी तक किया जाएगा, जिसके बाद 6 मार्च 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। ऊपर दिए गए तालिका में उत्तर प्रदेश SIR के प्रमुख तिथियों और महत्वपूर्ण आंकड़ों के साथ उन जिलों को भी दिखाया गया है जहां SIR के दौरान सबसे अधिक मतदाताओं के नाम काटे गए है, जो यह संकेत देते हैं कि यह प्रक्रिया  केवल एक प्रशासनिक औपचारिकता नहीं बल्कि व्यापक लोकतांत्रिक प्रभाव वाला हस्तक्षेप है।

निष्कर्ष: PS-PAC का आकलन और सिफ़ारिश

PS-PAC का आकलन है कि Special Intensive Revision (SIR) अब केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह चुनावी संतुलन और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को सीधे प्रभावित करने वाली प्रक्रिया बनती जा रही है। करोड़ों मतदाताओं का एक साथ सूची से बाहर होना, विशेषकर प्रवासी, शहरी गरीब और हाशिए के वर्गों के संदर्भ में, इस प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

 जरूर पढ़े – PS-PAC का उत्तर प्रदेश मॉडल: विधानसभा चुनाव 2027 के संदर्भ में

PS-PAC की सिफ़ारिश है कि SIR को स्वतंत्र निगरानी, पारदर्शी मानदंडों और व्यापक राजनीतिक सहमति के दायरे में लाया जाए। जिन क्षेत्रों में हटाए गए मतदाताओं की संख्या चुनावी जीत-हार के अंतर से अधिक है, वहाँ विशेष ऑडिट अनिवार्य किया जाना चाहिए। मतदाता सूची की शुद्धता के नाम पर मताधिकार से समझौता लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत है और इस पर तत्काल राजनीतिक हस्तक्षेप आवश्यक है।

 

 

 

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